जब बच्चों की नाक हो बंद तो करें ये उपाय

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बदलते मौसम में बच्चों की नाक बंद होना आम बात है। नाक बंद होना किसी को भी अच्छा नहीं लगता है, बच्चों को तो बुल्कुल भी नहीं। नाक बंद होने से बच्चे परेशान हो जाते हैं। कुछ ऐसे उपाय हैं जिनकी सहयता से आप अपने बच्चे को आराम से साँस लेने में मदद कर सकती हैं।
अगर आपका बच्चा बंद नाक की स्थिति से परेशान है ती कुछ बातों का ख्याल रख कर आप उसे आराम पहुंचा सकती हैं।


सबसे पहले तो आप को यह सुनिश्चित करना है की क्या आप के बच्चे की नाक वाकई बंद है। अगर ऐसा है तो आप को अपने बच्चे में निम्न लक्षण दिखेंगे।
नाक बंद होने की स्थिति में बच्चे बहुत चिड़चिड़ा बर्ताव करते हैं।
साँस लेते वक्त घरघराहट की आवाज आती है।
उन्हें भोजन करने में, स्तनपान और बोतल से दूध पिने में परेशानी होगी।
आप किस तरह उसे आराम पहुंचा सकती है?


बंद नाक की समस्या कई करने से हो सकती है जैसे की साधारण संक्रमण, जुकाम या फ़्लू। यह भी देख लें कि आप आप के बच्चे ने खेल-खेल में अपनी नाक में कुछ डाल तो नहीं लिए है। आप को विश्वाश नहीं होगा, मगर बच्चों में नाक बंद होने का यह कारण भी बहुत आम है।
बच्चे की नाक में झांक के देखिये की कहीं कुछ फंसा तो नहीं है। अगर आप को उसके नाक के छिद्र में कुछ फंसा हुआ दिखे तो निकलने की कोशिश न करें। तुरंत बच्चे को डॉक्टर के पास लेके जाएँ। अगर आप बच्चे की नाक में फंसी हुई वस्तु को खुद निकलने की कोशिश करेंगी तो हो सकता है को वह और अंदर चली जाये। बच्चे को इस दौरान मुँह से सांस लेने के लिए कहें।
नाक को रूमाल साफ़ कीजिये


साधारण संक्रमण, जुकाम या फ़्लू में आप बच्चे की नाक में नेसल स्प्रे का इस्तेमाल कर सकती हैं। इससे बच्चे को साँस लेने में बहुत आराम मिलेगा।
छोटे बच्चों में नेसल स्प्रे का इस्तेमाल करना बहुत चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योँकि छोटे बच्चे बहुत छटपटाते हैं और आसानी से नेसल स्प्रे का इस्तेमाल करने नहीं देते हैं।
शिशु की बंद नाक में नेसल स्प्रे अगर आप सही समय पे लगाती हैं तो तो शायद आप को अपने बच्चे में नेसल स्प्रे लगते वक्त उतनी दिक्कत का सामना न करना पड़े। शिशु की नाक में नेसल स्पर्य का इस्तेमा तब करें जब बच्चा शांत हो, और आरामदायक स्थिति में हो। यह सही समय होता है बच्चे की नाक में नेसल स्प्रे के इस्तेमाल करने का।


बच्चों में बंद नाक में नेसल स्प्रे का इस्तेमाल
अगर आप का शिशु दो साल से कम उम्र का है तो:
बच्चे को बिस्तर पे लिटा दें और उसके सर को एक तरफ कर दें
बेहतर तो यह होगा की आप अपने शिशु को तकिये के ऊपर लिटा दें ताकि उसके सर को पीछे की तिरफ झुकाने में आसानी हो जाये।
नेसल स्प्रे के नोजल को शिशु की एक नाक के छिद्र में डालें और केवल एक बार दबाएं।
यह प्रक्रिया दूसरी नाक के साथ भी दोहराएं।
अगर आप का शिशु दो साल से बड़ा है तो
शिशु की उम्र के अनुसार या तो उसे गोदी में लेलें या फिर उसे खड़ा कर दें।
शिशु के सर को एक हाथ से ऊपर की तरफ उठाएं।
शिशु की एक नाक में नेसल स्प्रे के नोजल दूसरी नाक को बंद कर दें। बच्चे की नाक में स्प्रे करें और अपने बच्चे से कहें की अपनी नाक से जोर से साँस लें।
यही प्रक्रिया दूसरी नाक के साथ भी दोहराएं।
अगर नेसल स्प्रे शिशु की आँख में चला जाये तो चिंता करने की कोई भी आवशकता नही है।
एक आसान सा टिप्स
अगर आप के शिशु की नाक इस कदर बंद है की रात को ठीक से सो नहीं पा रहा है तो आप एक और काम कर सकती हैं। नमी और गर्माहट बच्चे की नाक को खोलने में बहुत मददगार साबित हो सकती है। रात में बंद नाक के कारण अगर आप के बच्चे को नींद नहीं आ रही है तो आप स्नानघर में जा के गरम पानी का नल खोल दें।


गरम पानी के भाप में शिशु को 15 मिनट के लिए रखिये
इससे स्नानघर गरम पानी के भाप से भर जायेगा। अब इस भाप भरे स्नानघर में अपने बच्चे को गोदी में लेके पंद्रह (15) मिनट गुजारिये। इससे बच्चे को नाक खुलने में सहायता मिलेगी। अगर आप के शिशु को बलगम वाली खांस है, तो भी यह एक प्रभावी तरीका है।
कुछ आवश्यक बातें जिनका ख्याल आप को रखना है?
सर्दी, जुकाम और बंद नाक की स्थिति में जितना हो सके अपने बच्चे को आराम करने दें। आराम करने से बच्चे के शरीर को ताकत मिलेगी और वो जल्द ठीक हो पायेगा।
अगर आप के बच्चे की उम्र एक साल से ज्यादा है तो बंद नाक होने पर उसके सर के नीचे दो तकिये का इस्तेमाल करें ताकि उसका सर उसके शरीर की तुलना में थोड़ा ऊंचाई पर हो जाये।
शिशु के सर के निचे दो तकिये रख उसके सर को ऊँचा कर दीजिये
साधारणतया शिशु की बंद नाक की समस्या एक सप्ताह के भीतर समाप्त हो जानी चाहिए। संक्रमण के कुछ परिस्थितियोँ में दो सप्ताह भी लग सकता है।
कब डाक्टर से परामर्ष करें
सर्दी, जुकाम और बंद नाक ऐसी परिस्थितियां नहीं हैं की डॉक्टर के पास जाया जाये लेकिन अगर आप के शिशु की बंद नाक की समस्या किसी वस्तु के कारण है तो तत्काल डाक्टर के पास जायें। दूसरा अगर संक्रमण ठीक न हो रहा तो तब।

Anjali

मेरा नाम अंजली पाल है, मैंने डीयू (दिल्ली विश्वविद्यालय) से स्नातक किया है, मैं दिल्ली से हूं। मेरा मनना है – “जानकारी जितनी हो भी कम हो, कम ही रहती है”

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