Twins pregnancy ki Jankari

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गर्भावस्था में जुड़वा बच्चे

किसी भी महिला के लिए गर्भावस्था बहुत ही खुशी वाला समय होता है लेकिन अगर गर्भ में जुड़वा बच्चे हो तो यह खुशी दुगनी हो जाती है लेकिन जुड़वा बच्चो में दो नहीं बल्कि तीन लोगो की जिम्मेदारी होती है महिला को अपने साथ दो और जिन्दगियो की जिम्मेदारी होती है ऐसे में गर्भवती महिला को ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है इस समय और गर्भवती महिलाओ की अपेक्षा जुड़वा बच्चो की गर्भावस्था में अधिक खाने पीने की जरूरत होती है

किसी महिला के पेट में जुड़वा बच्चे हो तो उसे समान्य गर्भवती महिला से ज्यादा प्रोटीन कि जरूरत होती है
जुड़वा बच्चों में गर्भवती महिला का पेट समान्य गर्भवती महिला से ज्यादा बड़ा होता है तो अपने बढ़ते पेट को लेकर चिंता ना करे
जुड़वा बच्चों में महिला को मॉर्निंग सिकनेस ,मतली ,कमरदर्द आदि दिक्कतें ज्यादा हो सकती है पहली तिमाही में जुड़वा बच्चो में हल्की स्पोटिंग भी हो सकती है लेकिन अगर लगे की यह सामान्य नहीं है तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए
जुड़वा बच्चों में आयरन, कैल्शियम ,फोलिक एसिड आदि के सप्लीमेंट जरुर ले और साथ इन्हे अपने खाने में शामिल करे
दिन में पांच से सात बार फल और सलाद खाना चाहिए और भरपूर पानी पीना चाहिए

किसी भी प्रकार का वजन नहीं उठाना चाहिए घर के कामों में किसी मदद लेने से कतरना नहीं चाहिए
समान्य गर्भावस्था में बच्चे का जन्म चालीस जुड़वा बच्चों में नॉर्मल डिलीवरी के चांस कम ही होते है ज्यादातर ऑपरेशन की संभावना बनी रहती है समान्य गर्भावस्था में बीसवें सप्ताह में करवट लेकर सोने की सलहा दी जाती है लेकिन जुड़वा गर्भावस्था में सोलहवें सप्ताह से ही करवट ले कर सोना चाहिए क्योंकि बढ़ते यूट्रस की वजह से रक्त धमनियों में रक्त के संचार में बाधा आती इसलिए करवट ले कर सोना चाहिए जिससे रक्त संचार सही से होती है

जुड़वा बच्चे क्यों होते हैं और कैसे होते हैं ?

जुड़वा बच्चे दो तरह के होते हैं पहला  एक जैसे चेहरे दिखने वाली जिसे Identical twins कहा जाता है,और दूसरा अलग अलग चेहरे दिखने वाले जिसे Catholic twins कहा जाता है |

Identical twins: जब महिला के गर्भाशय में कोई एक अंडाणु पुरुष के कोई एक शुक्राणु से निषेचित हो जाता है और निषेचित होने के बाद वह निषेचित अंडा शुक्राणु के दो हिस्से में बट जाने की वजह से वह निषेचित अंडा भी दो हिस्सों में बट जाता है और उस महिला को जुड़वा बच्चे हो जाते हैं क्योंकि यह एक शुक्राणु के दो हिस्से में बटने की वजह से होता है तो इसीलिए इसे Identical twins कहा जाता है और इस तरह जन्मे जुड़वा बच्चों के चेहरे,कद,स्वभाव एक जैसी होती है |और दोनों एक ही थैली में होते हैं

Catholic twins : ज्यादातर महिलाओं के गर्भाशय में हर महीने सिर्फ एक अंडे ही फूटते हैं लेकिन कभी-कभी किसी कारण से जब उनके गर्भाशय में दो अंडे फूटते हैं और यह दोनों अंडा,पुरुष के किसी दो अलग-अलग शुक्राणु से आपस में निषेचित हो जाते हैं यानी कि मिल जाते हैं (क्योंकि पुरुषों में शुक्राणु की संख्या अनगिनत होती है) और इस तरह जुड़वा बच्चों का जन्म होता है |और दोनों अलग-अलग थैली में होते हैं

और इस तरह जन्म में जुड़वा बच्चों के चेहरे,कद,स्वभाव,आदतें अलग अलग हो सकती है और क्योंकि यह जुड़वा बच्चे दो अलग-अलग अंडे और दो अलग-अलग शुक्राणु से बने होते हैं |

जुड़वां गर्भावस्था में आराम: एक महत्वपूर्ण अवधि – चूंकि जुड़वां गर्भधारण अक्सर खराब  के परिणाम होता है, इसलिए कई चिकित्सक लंबे समय तक बिस्तर पर आराम करने की सलाह देते हैं।  नॉर्थ सेंट्रल इलिनोइस पेरिनैटल क्षेत्र में जुड़वां गर्भधारण की यह समीक्षा स्थापित करती है कि जुड़वाँ सबसे कमजोर होते हैं यदि वे 27 और 34 सप्ताह के गर्भ के बीच पैदा होते हैं। यदि बेड रेस्ट लगाया जाना है, तो संभवतः इसे समय पर किया जाना चाहिए ताकि इस कमजोर अवधि को प्रभावित किया जा सके। हस्तक्षेप (27 से 34 सप्ताह के गर्भकाल में अस्पताल में बेड रेस्ट) का खर्च  होता है,

जबकि गैर-निगमन (34 सप्ताह के पूर्ण गर्भ से पहले जन्म लेने वाले शिशुओं के लिए गहन देखभाल नर्सरी शुल्क) की लागत  प्रति जुड़वां गर्भावस्था होगी।  इस परिमाण की लागत, जुड़वां गर्भावस्था में बिस्तर आराम की प्रभावकारिता निर्धारित करने के लिए एक संभावित नियंत्रित परीक्षण अनिवार्य है

Anjali

मेरा नाम अंजली पाल है, मैंने डीयू (दिल्ली विश्वविद्यालय) से स्नातक किया है, मैं दिल्ली से हूं। मेरा मनना है – “जानकारी जितनी हो भी कम हो, कम ही रहती है”

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